भारत में निवेश के बढ़ते विकल्पों के बीच SBI Mutual Fund लगातार अपनी मजबूत उपस्थिति और स्थिर प्रदर्शन की वजह से निवेशकों का भरोसा जीतता आया है। देश का सबसे बड़ा म्यूचुअल फंड हाउस होने के नाते, SBI Mutual Fund समय-समय पर ऐसे इनोवेटिव और वैल्यू-ड्रिवन फंड पेश करता है, जो बदलते बाजार ट्रेंड्स का सीधा फायदा निवेशकों तक पहुंचाते हैं। सोना और चांदी की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों का जो उछाल पिछले साल देखने को मिला, उसका सबसे बड़ा लाभ SBI Mutual Fund के तीन फंड्स ने अपने निवेशकों को दिया है। यही कारण है कि इस समय SBI Gold Fund, SBI Gold ETF और SBI Silver ETF निवेशकों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बने हुए हैं।
पिछले एक साल में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में ऐतिहासिक तेजी दर्ज हुई, और इसी तेजी का सीधा असर इन फंड्स के प्रदर्शन पर दिखा। इन तीनों फंड्स ने 50% से भी अधिक का वार्षिक रिटर्न दिया है, जो किसी भी निवेशक के लिए बेहद आकर्षक माना जाता है। खास बात यह है कि ये सभी फंड्स पासिव कैटेगरी के हैं, यानी ये सीधे किसी कमोडिटी की कीमत को ट्रैक करते हैं और इनमें मैनेजमेंट की लागत बहुत कम होती है। इसके चलते रिटर्न पर खर्च का भार बहुत कम पड़ता है, जो निवेशकों के फायदे को और बढ़ा देता है।
SBI Mutual Fund
SBI Mutual Fund का पहला बड़ा फंड, SBI Gold Fund, जनवरी 2013 में लॉन्च हुआ था और यह घरेलू गोल्ड प्राइस को ट्रैक करता है। इस स्कीम का आकार अब हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता और मजबूत संरचना को दिखाता है। इस फंड ने पिछले एक साल में 51.67% का रिटर्न दिया है। गोल्ड को हमेशा से सुरक्षित निवेश का माध्यम माना जाता है, और जब भी आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं। यही कारण है कि इस फंड ने पिछले साल शानदार प्रदर्शन किया।
SBI Gold ETF
इसके बाद आता है SBI Gold ETF, जिसे 2009 में लॉन्च किया गया था। यह निवेश के लिए बेहद सुविधाजनक विकल्प माना जाता है, क्योंकि इसमें सोना डिजिटल रूप से ट्रैक किया जाता है और निवेशकों को फिजिकल गोल्ड रखने की कोई आवश्यकता नहीं होती। इस ETF का औसत खर्च भी बहुत कम है, और इसकी लिक्विडिटी भी मार्केट में काफी मजबूत रहती है। पिछले वर्ष इस ETF ने 51.36% का रिटर्न दिया, जो गोल्ड प्राइस की तेज उछाल को ही दर्शाता है। SBI Mutual Fund के सबसे पुराने सफल फंड्स में यह ETF शामिल माना जाता है।
SBI Silver ETF
इन दोनों के बाद SBI Silver ETF भी निवेशकों का ध्यान खींच रहा है। जुलाई 2024 में लॉन्च हुए इस ETF ने बहुत कम समय में शानदार ग्रोथ दिखाई है। चांदी की कीमतों में पिछले साल तेज बढ़ोतरी हुई थी, जिसका फायदा इस ETF को भी मिला और इसने 50.87% का रिटर्न दिया। चांदी को इंडस्ट्रियल मेटल भी माना जाता है, यानी इसमें निवेश सिर्फ महंगाई से बचने के लिए नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल डिमांड के चलते भी बढ़ सकता है। SBI Mutual Fund द्वारा पेश किया गया यह फंड निवेशकों को सिल्वर मार्केट में बिना किसी स्टोरेज झंझट के निवेश का मौका देता है।
ETF क्या होता है, यह समझना आज हर निवेशक के लिए जरूरी है। ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, जिसे शेयर की तरह स्टॉक मार्केट में खरीदा-बेचा जा सकता है। इसका मतलब है कि निवेशक डिजिटल रूप में सोने या चांदी का मालिक बन सकता है, बिना उसे घर में रखने की चिंता के। इसमें करंट प्राइस पर ही निवेश किया जाता है और इसकी यूनिट्स डिमैट अकाउंट में दिखती हैं। SBI Mutual Fund भारतीय बाजार में सबसे भरोसेमंद ETF प्रदाता के रूप में जाना जाता है, और इसका प्रबंधन पारदर्शी और मजबूत माना जाता है।
हालाँकि, निवेशकों को यह भी समझना जरूरी है कि पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। सोना और चांदी दोनों “सेफ हेवन” एसेट्स हैं, यानी जब शेयर बाजार या अन्य निवेश साधनों में अस्थिरता बढ़ती है, तब इनकी चमक बढ़ती है। लेकिन अगर मार्केट स्थिर रहता है या डॉलर मजबूत होता है, तो इनकी कीमतों में नरमी भी आ सकती है। इसलिए SBI Mutual Fund के इन फंड्स में निवेश करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और लक्ष्य को समझना बेहद महत्वपूर्ण है।
अगर आप अपने पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन चाहते हैं, तो गोल्ड और सिल्वर जैसे विकल्प आपके लिए स्थिरता का अच्छा स्तंभ बन सकते हैं। डिजिटल निवेश के बढ़ते दौर में SBI Gold Fund, SBI Gold ETF और SBI Silver ETF जैसे विकल्प लंबे समय के निवेशकों के लिए आकर्षक हो सकते हैं। इन फंड्स की खासियत यह है कि ये मार्केट में कमोडिटी की कीमतों के साथ सीधा जुड़ाव रखते हैं, इसलिए इनका व्यवहार सरल और पारदर्शी रहता है। निवेशक जितना चाहे निवेश कर सकते हैं और जब चाहे सहजता से बाहर निकल सकते हैं।
Conclusion
अंत में यही कहा जा सकता है कि SBI Mutual Fund के ये तीन कमोडिटी-आधारित फंड्स इस समय निवेशकों के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभरे हैं। पिछले एक साल का प्रदर्शन इनकी क्षमता को अच्छी तरह दर्शाता है, और यदि कोई निवेशक अपने पोर्टफोलियो में स्थिरता, सुरक्षा और वैल्यू एडिशन चाहता है, तो इन फंड्स पर नजर अवश्य डालनी चाहिए। लेकिन अंतिम फैसला हमेशा सोच-समझकर, अपनी जोखिम प्रोफाइल और निवेश उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ही लेना चाहिए, क्योंकि सफल निवेश वही है जो व्यक्ति की जरूरत और समय-सीमा के अनुरूप हो।
